Sunday, May 31, 2015

फूँक फूँक  कर ही यहाँ,बेटा धरना लात
बबलू ने  हामी भरी, यही  करूँगा तात
यही करूँगा तात मानकर सतकी सीड़ी
तबसे  धरता  पाँव फूँक कर पहले बीड़ी
धूँए  का  शौकीन जी रहा थूक थूक कर
सारा दिन सिगरेट पी रहा फूँक फूँक कर

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Monday, May 25, 2015

ताऊ बोल्या "सीरीज"-----------------
सौ दिन खागे आपिये ताऊ पीग्या साल
घर बाहर  दोनों जगह भैया ठालम ठाल
भैया ठालम  ठाल,बँधा ना गल मैं घण्टा
आच्छे  दिन हैं यार  नहीं है घर मैं टण्टा
के बोलै शौक़ीन देख ली सबकी खो खो
बिल्ली  सै  बीमार, लिये खा चूहे नौ सौ

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Wednesday, May 20, 2015

जैसे धरती गोल है चक्र समय का गोल
शब्द व्योम में घूमते सोच समझकर बोल
सोच समझकर बोल प्रकट जब होंगे आगे
बोल  बनेंगे  भूत   फिरोगे  भागे  भागे
कहता है   शौक़ीन  बड़े अच्छे हो वैसे
थोड़े  हो  नादान  मगर बच्चों के जैसे

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Saturday, May 16, 2015

बागड़ बिल्ले खोजते सीधी सादी कैट
पकड़ रहे हैं तितलियाँ बिछा बिछाकर नैट
बिछा बिछाकर नैट कई चंदू बुक सेलर
सिर्फ जनाना सूट सीलते हैं कुछ टेलर
सच्चाई शौक़ीन, बेचती घर घर पापड़
बेच रहे हैं झूठ  अदब से बिल्ले बागड़

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Sunday, May 3, 2015

इसमें सुविधा एक है,दुविधा मिलें हजार
शादी  करके  आदमी   हो जाता लाचार
हो  जाता  लाचार  दरोगा  बनती  बीबी
घोषित करती चोर खिलाकर अलपन लीबी
आग भला शौक़ीन हुई है किसके वश में
रोटी  मिलती  गर्म यही है सुविधा इसमें
(अलपन लीबी=टॉफी)
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Saturday, May 2, 2015

नटखट खटपट कर रहे चाचा खींचों कान
वरना  सत्यानाश   सब  कर  देंगे शैतान
कर  देंगे  शैतान  तुम्हारे  गुड़  का  गोबर
ढ़ीली  हुई  लगाम  सँभालो अपने जोकर
कहता है  शौक़ीन जरा सा  खाते चटपट
ज्यादा रहे बिखेर अनाड़ी वानर नटखट

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