Wednesday, June 29, 2016

चलते थे दो पाँव पर,चला रहे अब कार
और भला क्या दे कहो,बाबू जी सरकार
बाबू जी सरकार,चलाते तुम दफ्तर से
वेतन  रहे  सफेद,मिले काला ऊपर से
मुफ्त खोर शौक़ीन,पलेंगे पलते-पलते
हे सरकारी फौज,मजे लो चलते-चलते

सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐 29/06/2016
 रचनाकार @    कवि सुजीत शौकीन
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Tuesday, June 21, 2016

ले लो हाथों पर वजन,सिर पर रख्खो लात
दुनिया सीधी देख लो,कर के उल्टा गात
कर के उल्टा गात,सुनो अब सीधा भाषण
करना मत बदनाम,गजब है वृश्चिक आसन
कहता है शौक़ीन,न चौसर इस से खेलो
कर लो सच्चा योग, ट्रेनिंग मुझ से ले लो

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Tuesday, June 14, 2016

किनारे तोड़ कर बहता है जन सैलाब भारत में
कहीं यू पी कहीं उडता हुआ पंजाब भारत में

तिजारत तो हुई कश्मीर से कन्या कुमारी तक
सियासत बेचती आई नशीले ख़्वाब भारत में

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