Sunday, August 21, 2016

ओलम्पिक के खेल पर,करना क्यों जी ग़ौर
राजनीति  के खेल के,हम  ही  हैं सिरमौर
हम ही हैं  सिरमौर,करा  लो  जितने पंगे
रोज  सियासी  खेल, खेलते  होकर  नंगे
करता है शौक़ीन,अकारण ही क्यों चिकचिक
सतत सियासी खेल,चले दस दिन ओलम्पिक

सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐21/08/2016
 रचनाकार @    कवि सुजीत शौकीन
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Monday, August 8, 2016

आए भाटा ज्वार के,मध्यम पडते राग
बहुत देर तक क्षार के,रहें न फूले झाग
रहें न फूले झाग,समय का पलड़ा भारी
हवा हवा हो जाय,न रखती पक्की यारी
जैसा हो शौक़ीन,समय को काटा जाए
चन्द्र बढे तो ज्वार,घटे तो भाटा आए
08/08/2016
रचनाकार©कवि सुजीत शौक़ीन
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Sunday, August 7, 2016

आप सभी मित्रों को मित्र दिवस की हार्दिक
शुभकामनाएं। लीजिए ज्योतिष की अपनी पढ़ाई आपसे साझा कर रहा हूँ। - - - - - - -
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चार पाँव  हर राशि के, निकृष्ट लोहा स्वर्ण।
सखा ताम्र से कृष्ण जी,मिले रजत से कर्ण।।

लोह पाँव दे जायगा ,जातक  को सौ रोग।
दोस्त बना कर भोगता,पूर्व जन्म के भोग।।

स्वर्ण पाँव पर चन्द्रमा,जातक का यदि होय।
पग पग लूटा जायगा,भाग्य कमा कर खोय।।

सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐 07/08/2016
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