Sunday, March 19, 2017

भोगी गठरी बाँध लें,अब न चलेंगे भोग।
अब  सत्ता  के वास्ते,लेना होगा जोग।।

©कवि सुजीत शौक़ीन
19/03/2017

Saturday, March 11, 2017

यू पी में दिन आ गए,अच्छे आखिरकार।
जीत हुई है धर्म की, जात-पात की हार।।

बोल रहे थे जो बहुत, यू पी के तुम कौन।
बोली के सरताज ने,किया उन्हीं को मौन।।

बँटवारे ने तोड़ दी,सोने की पतवार।
सैफइ में करने लगी,यादव सेना रार।।

चले दिखाने थे करँट,बिजली का सरकार।
गलती से ख़ुद ही मियाँ,छू बैठे हैं तार।।

बोले कुर्ता फाड़कर,खुदको आप फ़क़ीर।
आज फ़क़ीरी आपकी,यू पी में तकदीर।।

सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐11/03/2017
 रचनाकार @    कवि सुजीत शौक़ीन
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