Monday, June 5, 2017

छप्पन जी के सामने,नहीं पड़ी जब पार
चौबे  जी  पढ़ने  लगे,गीता  जी का सार
गीता जी का सार,भगत को मोक्ष दिलाता
अक्सर पढते लोग,समय जब अंतिम आता
इस विधि में शौक़ीन,अभी हो घोर अकिंचन
श्लोक सात सौ बाँच,चुका है अपना छप्पन

©सुजीत शौक़ीन
05/06/2017