Saturday, August 9, 2014

आज गलि गलि हैवान खडे,,
दुर्योधन जो छाती तान खढे।
आकर द्रौपदी को उबार ले,,
हे कृष्ण फिर अवतार ले।
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तू बंशीधर, तू लीलाधर है,,
हिन्द तेरी बहन का घर है।
सुभद्रा का कुछ मान बढे,,
द्रौपदी चीर परीधान बढे।
तू सुदर्शन धरा उतार दे,,
हे कृष्ण फिर अवतार ले।
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बाल सुलभा या बूढ़ी अम्मा,,
लुट रही,है कानून निकम्मा।
कालियानाग आसाराम बने,,
धृतराष्ट्रों के अभिमान बढे।
नरसिंह सा नाद उतार दे,,
हे कृष्ण फिर अवतार ले।
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यौवन हुआ कुंठित मन में,,
नारी है भय भीत वतन में।
धर्मका कुछ परिमाण बढे,,
धरती पे फिर ईमान बढे।
तू आकर चमन संवार दे,,
हे कृष्ण फिर अवतार ले।
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सर्वाधिकार सुरक्षित@सुजीत शौकीन
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