Sunday, September 14, 2014

मैं बुढी हो गई हूँ,
श्रष्टि में किसी भी जीवित चीज से,
अधिक आयु है मेरी,
परन्तु लगता है,
जीवन अब आसान नहीं मेरे लिए,
एक तो यह वृद्ध काया,
उसपे मेरे बच्चों के द्वारा मेरा दुत्कार,
मेरे बच्चे एक विदेशी,
मेम को माम कहके खुश हो रहे हैं,
और उन्हें शर्म आने लगी है,
 मुझ क्षीणकाय को अम्मा कहने में,
परन्तु फिर भी एक आस,
मुझे जीवित रखे है,
मेरे कुछ बच्चे मुझे ड्राईंग रूम में,
एंटीक की तरह सहेजे हैं,
और साल में एकबार,
मुझे सार्वजनिक रूप से याद करते हैं।
मैं माँ हूँ इसलिए,
अपने बच्चों का अहित,
सोच भी नहीं सकती,
                इसलिए चाहती हूँ,
      ऐ मेरे बच्चो ,खुश रहो,
   भले ही माम के साथ रहो,
   पर मत भूलो मैं हिंदी हूँ,
     और मैं ही तुम्हारी माँ हूँ,,
              मैं ही तुम्हारी माँ हूँ।
14/09/2014 हिन्दी दिवस......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुजीत शौकीन
For more like my page:----
https://www.facebook.com/pages/Kavi-Sujeet-Shokeen/253451778196049
ब्लाग: http://sujeetshokeen.blogspot.in
ब्लाग २:   http://gazal-e-shokeen.blogspot.in
फेसबुक: https://www.facebook.com/sujeet.shokeen

No comments:

Post a Comment