Wednesday, February 25, 2015

लोगो देखो फिर चढ़ा विक्रम पर बेताल
फिरफिर वैसा हाल है फिरफिर वही सवाल
फिर फिर वही सवाल देश से करते अन्ना
खेत बिके जो यार कहाँ फिर बोएँ गन्ना
कहता  है शौकीन   बैठ कर देखो पोगो
बोतल नई~ शराब पुरानी~देखो लोगो

(25/02/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Wednesday, February 18, 2015

चेले चार चिलम भरें,चेली चरण दबाय
नर नारी अर्पण करें,काली पीली आय
काली पीली आय,साध बन छोटामोटा
छोड़ नौकरी यार,बाँध ले लाल लँगोटा
बिन  माँगे  शौकीन, कहेंगे ले ले ले ले
हमारी भी सलाम, वोट जब माँगें चेले

(19/02/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Monday, February 16, 2015

बम बम का निनाद,शंखनाद  घंटनाद,
आरती में डम डम,डमरू के ताल की।

आदिऔअनादिनाथ,भूतनाथ भोलेनाथ,
अंग पे अनंग छवि,सजी है कमाल की।

योगी हठयोगी और,भोगियों वियोगियों की,
चहुँ दिश आ रही हैं,सज धज पालकी।

रुद्र माल गले डाले,नंग हैं अखाड़े वाले,
बोल रहे  जय जय, जय महाकाल की।

मनहरण
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Sunday, February 15, 2015

कूटा काटा पाक को,कप करना क्या यार
हरा दिया नापाक अब,जीत मिले या हार
जीत  मिले या हार,उसी की लव लेड़ी थी
बदला लिया विराट,अनुष्का क्यूँ छेड़ी थी
भारत की  थी नार,फिल्म  में  चूमा चाटा
गुस्से में था यार, इसलिये कूटा काटा

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Friday, February 13, 2015

आना कानी में हवा, बदल रही कुछ रंग
भँवरों का मन बाँवरा,शरद गरम के संग
शरद गरम के संग, करे इस माह सगाई
रजाई कुछ उदास, माँगने  लगी  विदाई
वैलंटाइन  मंत्र,  जपो मत   हिन्दुस्तानी
सवा सौ हैं करोड़, करो अब आनाकानी

(13/02/2015)
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Thursday, February 12, 2015

बम  पटाखे  फूल झड़ी,फूटे  नहीं अनार
कलपुर्जे जो चले नहीं,वापिस भेजो यार
वापिस भेजो यार कि घरकी दाल सही है
कुकड़ू कूँ आजाद करे क्या बात कही है
देखा है शौकीन शाजिया कृष्णा का दम
सबको था मालूम,बेवजह समझे थे बम

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Wednesday, February 11, 2015

है जनता का फैसला,सहर्ष लो स्वीकार
बेतुकी  बकवाद कहीं,बढ़ा न  देवे रार
बढ़ा  न  देवे  रार, देखती  जनता भाई
थोड़ा धर लो धीर,चले  कब वाई फाई
व्यंग्य करे शौकीन, नहीं संता बंता का
तुरत फुरत अब धैर्य,टूटता है जनता का

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Monday, February 9, 2015

किसी तरह  से आप ने,ली है बिल्ली मार
धरने जुमले छोड़ अब,काम करो सरकार
काम  करो सरकार, कि  वादे  नहीं चलेंगें
दिल  माँगे  अब  मोर,  इरादे  नहीं  चलेंगें
दिल्ली में शौकीन, बहकते नहीं  जिरह से
जुमलों से ये जीत,मिली है किसी तरह से

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Thursday, February 5, 2015

फैल चुका है रायता,बहुत चुनावी गंद
अभी बारी  जनता की, भोंपू सारे बंद
भोंपू   सारे  बंद  हुए  हैं  सब संतों के
जनता करे इलाज वैद बन विषदंतों के
देख रहा शौकीन कौन किस और झुका है
कौन  करेगा साफ, रायता फैल चुका है

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खेल चार दिन वाला,जीवन की रंगशाला,
धूप  कभी  छाँव  संग,  खेल  मेहमान ले।

रूह का  सफर  मानों,देह  इक  घर मानों,
चलती  का  नाम गाड़ी, रेल सम जान ले।

मानो मत इसे खेल, और नहीं कोई रेल,
अनंग से  आकार का,  मेल  पहचान ले।

दीप में  ईशान जले,तभी ये उजास रहे,
देह   दीप सम    रूह,तेल सम मान ले।

अनंग=निराकार
ईशान=ज्योति
------मनहरण घनाक्षरी---------
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Tuesday, February 3, 2015

चल रहे हैं ट्वीट कहीं और कहीं पर ब्लोग
फुलटास पर हैं  नेता,ओवर हैं  अब स्लोग
ओवर हैं अब  स्लोग,हरेक बाल पर छक्के
वोटर  सिलि प्वाइंट खड़े  हैं  हक्के  बक्के
छंद   कहे   शौकीन,  अंधेरे   जल  रहे  हैं
दो  वाले  सब चार  पाँवों  पर  चल रहे हैं

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बता दो आप कब कहाँ, हमनें मांगे मंच
कविता केवल शौक से,करते नहीं प्रपंच
करते   नहीं   प्रपंच,  सदा  अंधेरे   कूटे
नहीं  हवा  को  यार, बाँध  पाएँ  हैं खूँटे
मस्त बड़ा शौकीन,आँख से बंद हटा दो
जलना  है  बेकार, अंधेरों  को  बता  दो

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Monday, February 2, 2015

झाड़ू कोई हाथ या,थाम खड़ा है फूल
हमको  लगते  एक से, सारे नामाक़ूल
सारे नामाकूल,बदलते इत उत पाला
देखी तवा परांत, वहीं पर ड़ेरा ड़ाला
खाने को हर बार, मिलें सत्ता के आडू
बेशक ही फिर यार,लगानी होवे झाड़ू

नामाक़ूल=नालायक
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Sunday, February 1, 2015

जाम खुलेगा या रहे,मफलर या फिर क्रेन
दिल्ली  वाले  मथ रहे, दही  हुआ  है ब्रेन
दही हुआ है ब्रेन, मामला  फिफ्टी फिफ्टी
क्यों न सी  एम एक,रखे दूजे  को डिप्टी
सर्दी है  शौकीन  कहाँ अब  आम पकेगा
फास्ट ट्रैक पर क्रेन लगी है जाम खुलेगा

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