Saturday, April 4, 2015

मनुष्य काम क्रोध लोभ मोह बंध काट दे
सुगन्ध बाँट विश्व के अपथ्य मार्ग पाट दे
समीर वृद्धि की बहे अबाध ठाटबाट दे
महाबली किसान को खुले हिये कपाट दे

(04/04/2015)     पंचचामर छंद
काव्यमित्र परिवार,सर्वाधिकार सुरक्षित
  रचनाकार @    कवि सुजीत शौकीन

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