Saturday, June 27, 2015

लोकतंत्र की परिभाषा का,
        सुविधा से करते अनुवाद।
बो कर कांटे सींच रहे हैं,
       करने को बगिया बरबाद।।
कठमुल्ले सत्ता के दल्ले,
              बँटवारे की देते खाद।
ये ही आजादी है तो फिर,
         अपना भारत है आजाद।।
कुछ लोगों ने बाँध लिया है,
       राजसौख्य को अपने द्वार।
जनता हारी अब भारत की,
    बदल बदल अपनी सरकार।।
बस नेता आजाद हुए हैं,
           झूठे बाकी वाद विवाद।
भोली है भारत की जनता,
         फिरती है सर्पों को लाद।।

(28/06/2015)
(आल्हा छंद)सर्वाधिकार सुरक्षित
रचनाकार ©कवि सुजीत शौकीन
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Friday, June 26, 2015

भीगे भीगे से मौसम में,ताप चढ़ा है दिल्ली में
थूक बिलोते हैं नेतागण,झाग बढ़ा है दिल्ली में

इक दूजे को नंगा करते,कौन मगर शर्मिंदा है
असमंजस है दर्शक अन्धे,या की दर्पण अंधा है
कुकुभ छंद
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Thursday, June 25, 2015

आगे  निकले  चोरटे,  पीछे  छूटे  शाह
इक दूजे को साँग में, करते वा वा वाह
करते वा वा वाह,जिन्होंने ग़ज़ल सुधारी
ग़ज़ल पिलपिली यार,बताते बहुत करारी

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Sunday, June 21, 2015

करते भाग गुणा घटा,पीछे छूटा योग
अपनें अपनें  ढ़ोंग में, जुटे हुए हैं लोग
जुटे  हुए हैँ लोग,चकाचक योगा होगी
दिल्ली में  है होड़,यहाँ  हैं  सारे जोगी
कहता है शौक़ीन,हकीकत ड़रते ड़रते
होता समतल पेट,अगर रोजाना करते

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करते भाग गुणा घटा,पीछे छूटा योग
विषय वासना भोगमें,जुते हुए हैं लोग
जुते हुए हैं लोग,बैल कोल्हू के बनकर
चरते जैसे ढ़ोर,जुगाली करते दिनभर
फैशन में शौक़ीन,क्रीम बस मुँह पर मलते
भीतर तन कंगाल,दिखावा बाहर करते

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Friday, June 19, 2015

रमजान  सिखाता  है नेकी
रोजागर  सब्र  कमाता है

हक बाँट जरूरतमन्दों का
तब अपना हिस्सा खाता है

इफ्तार  कराता  जो बन्दा
खुद रोजागर  हो जाता है

हकदार वही है जन्नत का
जो शख्स अना रख पाता है

मत्त सवैया छंद(काव्यमित्र में प्रस्तुत)
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Wednesday, June 17, 2015

वो कौन शिकारी है जिसने,घनघोर निशाना साधा है
हिरनी की आड़ निशाने पर,लेकिन जंगल का राजा है
क्या उसको इतना भान नहीं,राजा मजबूत खिलाड़ी है
वो  पल में  ताड़  गया होगा, परदे में  कौन अनाड़ी है
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काव्यमित्र में प्रस्तुत एक सवैया
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Saturday, June 13, 2015

कूड़ा कूड़ा हुई सियासत, अड़ बैठा झाड़ू वाला
राशन पानी ले दिल्ली पर,चढ़ बैठा झाड़ू वाला
या तो दे दो  ताकत सारी, वरना धरना  दे देंगे
लगता है धरने का नाटक,गढ़ बैठा झाड़ू वाला

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Sunday, June 7, 2015

जनमन बंग्लादेश का,करता तुझे सलाम
बंग संग  है हिन्द के,सुन लें  देश  तमाम
सुन लें देश तमाम,कि भारत बोल रहा है
मिलकर बनें महान,कथन अनमोल कहा है
रंग सभी  शौक़ीन, अगर हो जाएँ रोशन
इन्द्रधनुष हो राष्ट्र,खिले भारत का जनमन
🌹🌹 🌻🌻
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