लोकतंत्र की परिभाषा का,
सुविधा से करते अनुवाद।
बो कर कांटे सींच रहे हैं,
करने को बगिया बरबाद।।
कठमुल्ले सत्ता के दल्ले,
बँटवारे की देते खाद।
ये ही आजादी है तो फिर,
अपना भारत है आजाद।।
कुछ लोगों ने बाँध लिया है,
राजसौख्य को अपने द्वार।
जनता हारी अब भारत की,
बदल बदल अपनी सरकार।।
बस नेता आजाद हुए हैं,
झूठे बाकी वाद विवाद।
भोली है भारत की जनता,
फिरती है सर्पों को लाद।।
(28/06/2015)
(आल्हा छंद)सर्वाधिकार सुरक्षित
रचनाकार ©कवि सुजीत शौकीन
09811783749
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बो कर कांटे सींच रहे हैं,
करने को बगिया बरबाद।।
कठमुल्ले सत्ता के दल्ले,
बँटवारे की देते खाद।
ये ही आजादी है तो फिर,
अपना भारत है आजाद।।
कुछ लोगों ने बाँध लिया है,
राजसौख्य को अपने द्वार।
जनता हारी अब भारत की,
बदल बदल अपनी सरकार।।
बस नेता आजाद हुए हैं,
झूठे बाकी वाद विवाद।
भोली है भारत की जनता,
फिरती है सर्पों को लाद।।
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