बादल बरसे झूमके झमझम मूसलधार
आलिंगन धरती करे मनकी बाँह पसार
मनकी बाँह पसार प्रीत दाता भी पाता
हर्षित धरती मात संग हलधर हर्षाता
कहता है शौक़ीन गगन में नाचे पागल
कितने दामन चूम रहा मनमौजी बादल
(13/08/2015)
रचनाकार©कवि सुजीत शौकीन
09811783749
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आलिंगन धरती करे मनकी बाँह पसार
मनकी बाँह पसार प्रीत दाता भी पाता
हर्षित धरती मात संग हलधर हर्षाता
कहता है शौक़ीन गगन में नाचे पागल
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