Monday, November 30, 2015

बिजली पानी मुफ्त की,बाँटे लल्लू लाल
सत्ता घर की टाल है,वोटर की ससुराल
वोटर   की  ससुराल,जमाई  सारे  साडू
खुली तिजोरी देश,लगाते मिलकर झाडू
बाँध पैर में डोर, उडाते नभ में तितली
नेता फेंके  माल,छमाछम नाचे बिजली

(30/11/2015)
सर्वाधिकार सुरक्षित
©कवि सुजीत शौक़ीन
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Thursday, November 19, 2015

बधाई हो...................................
थाने  के  सरकार हैं ,होने  थे  जो क़ैद
दीमक फिरसे खेत में,किए गए मुस्तैद
किए गए मुस्तैद,लगाओ जयजयकारा
आरक्षण की भैंस,चरेगी चर चर चारा
जल्दी  ही शौक़ीन  लगेंगे  शोर मचाने
अपनीअपनी फ़ौज,खुलेंगे घरघर थाने

सर्वाधिकार सुरक्षित©सुजीत शौक़ीन
تہانے کے سرکار ہیں ہونے تہے جو قید
دیمک پہر سے کہیت میں کیے گئے مُستیر
کیے گئے مُستید لگاو جی جیکارا
آرکشن کی بہینس چریگی چر چر چارا
جلری ہی شوقین لگینگے شور مچانے
اپنی اپنی فوج کہُلینگے گہر گہر تہانے
©سُجیت شوقین
(20/11/2015)
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Saturday, November 14, 2015

बाल दिवस के मायने,उससे पूछें खास।
मांग रहा है भीख जो,बाल भवन के पास।।
(14/11/2015) ©सुजीत शौक़ीन
بال دوس کے ماینے اُس سے پُوچہیں کہاس
مانگ رہا ہے بہیکہ جو نال نہوب کے پاس
©سُجیت شوقین

Friday, November 6, 2015

लौ जी"वोट मशीन"में,हुआ फैसला बंद
देखा खूब बिहार का,जाति बद्ध हुडदंग
जाति बद्ध हुडदंग,चुनावी ता ता थैय्या
जनता सीधी गाय,ठगी जाएगी  गैय्या
कहता है शौक़ीन,छुरी चाकू की भौजी
विष जीते या जाम,मजा दोनों का लौ जी

(06/11/2015)
रचनाकार©कवि सुजीत शौक़ीन
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Tuesday, November 3, 2015

पुरुष स्त्री से वही चाहता है जो उसके पास है, जबकि औरत दुनिया की हर चीज पुरुष से चाहती है, उसके पास हो न हो।
         मतलब पुरुष परस्पर सम्बन्ध में ज्यादा  व्यवहारिक है,यानी संतोषी होता है।
         यार ये औरतें इतनी अस्त व्यस्त क्यों होती हैं, झगड़ा भी ठीक से नहीं करतीं, कारण कुछ होता है, जो पुरुष कभी समझ ही नहीं पाता, और लडाई किन्हीं अन्य कारणों से करतीं हैं।
       कई माननीय महिला मित्रों के 'स्त्री विमर्श' पढ़ने पडे आज, दिमाग की दही होने लगी तो सोचा, फेसबुक मित्रों के सामने रख देता हूँ इस दही को, वो मथेंगे तो शायद कुछ मक्खन निकल आए।

(03/11/2015) @सुजीत शौक़ीन
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