अरे पगले..........
जो तुमने कच्ची जड़ निकाली है "तारपन" कहकर,
तुमने अपने थोड़े से आहार के लिए एक ताड़ को
वृक्ष होने से रोका है पगले।
काश तुमने वो जड़ निकालकर न खाई होती तो
वो एक वृक्ष बनकर बहुत सारे लाभ देता, क्या भूल
गए वो नशा ताड़ी का?
वो सिर्फ मोबाइल थोड़े था,
जो तुमने चुराया, उसमें मेरी अधूरी कविताएँ,गज़लें,
और कई प्रकार के छंद थे जो पूर्ण होने के इंतजार में
अभी कापी पर नहीं उतरे थे।
अगर वो पूरे हो जाते तो सोचो मुझे कितना सूकून
देते, बिल्कुल वैसे जैसे ताड़ के ऊंचे पेड़ पर चढ़कर,
हाण्डी उतार कर लाना, फिर नर्म जमीन पर बैठकर,
एक एक घूंट हलक से उतारना, कभी इस तरह का
नशा नहीं किया न पगले।
तुमने जो चुराया है मुझसे वो मेरा हक था जो मैंने
कमाया था अपनी काबिलियत से किसान की तरह''#
और जो तुमने मुझसे छीन लिया है आरक्षण बनकर ##
- - - - वो मेरा हक था, और ये तुम्हारी राजनीति - - - - -
#अरे पगले, अरे पगले#
जय राम जी की बोलना पडे़गा
(23/02/2016)
सर्वाधिकार सुरक्षित©सुजीत शौकीन
For more like my page:----https://www.facebook.com/pages/Kavi-Sujeet-Shokeen/253451778196049
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जो तुमने कच्ची जड़ निकाली है "तारपन" कहकर,
तुमने अपने थोड़े से आहार के लिए एक ताड़ को
वृक्ष होने से रोका है पगले।
काश तुमने वो जड़ निकालकर न खाई होती तो
वो एक वृक्ष बनकर बहुत सारे लाभ देता, क्या भूल
गए वो नशा ताड़ी का?
वो सिर्फ मोबाइल थोड़े था,
जो तुमने चुराया, उसमें मेरी अधूरी कविताएँ,गज़लें,
और कई प्रकार के छंद थे जो पूर्ण होने के इंतजार में
अभी कापी पर नहीं उतरे थे।
अगर वो पूरे हो जाते तो सोचो मुझे कितना सूकून
देते, बिल्कुल वैसे जैसे ताड़ के ऊंचे पेड़ पर चढ़कर,
हाण्डी उतार कर लाना, फिर नर्म जमीन पर बैठकर,
एक एक घूंट हलक से उतारना, कभी इस तरह का
नशा नहीं किया न पगले।
तुमने जो चुराया है मुझसे वो मेरा हक था जो मैंने
कमाया था अपनी काबिलियत से किसान की तरह''#
और जो तुमने मुझसे छीन लिया है आरक्षण बनकर ##
- - - - वो मेरा हक था, और ये तुम्हारी राजनीति - - - - -
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जय राम जी की बोलना पडे़गा
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