Saturday, July 5, 2014

गजलकार,हम हैं हुजूर,,
आप गजल का बीज हैं।
हुस्न है तो,हम भी शायर,,
वरना हम क्या चीज हैं।

ये ना पूछो,आप हमसे,,
क्यों परवाना,शमां पे जले?
जल रहा है,इसलिए की,,
रोशन उसकी दीद है।

चांद छुपता,नहीं कभी भी,,
सच्ची अगर जो प्रीत है।
दिल में रोशन,चांद है तो,,
अमावस में भी ईद है।

मन की वीणा,बजती है तो,,
हर सदा में संगीत है।
मन से निकले,छू ले मन,,
मधुर हर वो गीत है।
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुजीत शौकीन
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