Tuesday, July 1, 2014

मोक्षदायिनी भरी हुई है रोष,,
संभल जाओ अब करलो होश।
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त्यागो घरबार, चलो हरद्वार,,
    छोडो दुनिया के,सब कारोबार।
पाप करके भी,नहीं डरना होगा,,
गंगा में बस रोज,उतरना होगा।
सुबह शाम फिर होगी बमबम,,
और जटाजूट का झरना होगा।
भोले बाबा की,झूठी भक्ति करके,,
भोली जनता को,बस ठगना होगा।
कृपा गंगा मैया की अपरमपार,,
गंगा घाट पर लगा सदा त्योहार।
त्यागो घरबार, चलो हरद्वार,,
    छोड़ो दुनिया के,सब कारोबार।
पाप कमाओ और गंगा नहाओ,,
नहाओ गंगा और घाट सडाओ।
गंगा मैया सदा सदा से जोगन,,
नहीं तुम उसका,मान घटाओ।
गंगा मैया पूरी ही धरा धो देगी,,
वरना तो इसके घाट बचाओ।
पुण्य का यहाँ ना करो व्यापार,,
श्रद्धा लेकर आओ बारम्बार।
त्यागो घरबार, चलो हरद्वार,,
    छोड़ो दुनिया के,सब कारोबार।

सर्वाधिकार सुरक्षित@सुजीत शौकीन
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