Sunday, May 22, 2016

बोली मुर्गी🐔 लाल से,तुमसे महँगी दाल
बचके रहना क्या पता,कर दे कौन हलाल
कर दे  कौन  हलाल,समय  है  हाहाकारी
पंडित,मुल्ला,गाँव,शहर सब🍖मांसाहारी
आओ जी शौक़ीन,चखो अरहर की गोली⭕
घर की  मुर्गी, दाल बना कर, मारे  बोली

सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐 22/05/2016
 रचनाकार @    कवि सुजीत शौकीन
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