बोली मुर्गी🐔 लाल से,तुमसे महँगी दाल
बचके रहना क्या पता,कर दे कौन हलाल
कर दे कौन हलाल,समय है हाहाकारी
पंडित,मुल्ला,गाँव,शहर सब🍖मांसाहारी
आओ जी शौक़ीन,चखो अरहर की गोली⭕
घर की मुर्गी, दाल बना कर, मारे बोली
सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐 22/05/2016
रचनाकार @ कवि सुजीत शौकीन
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बचके रहना क्या पता,कर दे कौन हलाल
कर दे कौन हलाल,समय है हाहाकारी
पंडित,मुल्ला,गाँव,शहर सब🍖मांसाहारी
आओ जी शौक़ीन,चखो अरहर की गोली⭕
घर की मुर्गी, दाल बना कर, मारे बोली
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