Friday, December 25, 2015

छोटे मोटे सब यहाँ,सत्ता मद में चूर
तू तू  मैं मैं  का यहाँ,चलता है दस्तूर
चलता है दस्तूर,छुरी चाकू की भोजी
इक दूजे पर दोष,लगाते सारे खोजी
कहता है शौक़ीन,चलन में सिक्के खोटे
कांग्रेस  हैरान, बड़े  कब  होंगे  छोटे
(25/12/2015)
सर्वाधिकार सुरक्षित
©कवि सुजीत शौक़ीन
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Monday, November 30, 2015

बिजली पानी मुफ्त की,बाँटे लल्लू लाल
सत्ता घर की टाल है,वोटर की ससुराल
वोटर   की  ससुराल,जमाई  सारे  साडू
खुली तिजोरी देश,लगाते मिलकर झाडू
बाँध पैर में डोर, उडाते नभ में तितली
नेता फेंके  माल,छमाछम नाचे बिजली

(30/11/2015)
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Thursday, November 19, 2015

बधाई हो...................................
थाने  के  सरकार हैं ,होने  थे  जो क़ैद
दीमक फिरसे खेत में,किए गए मुस्तैद
किए गए मुस्तैद,लगाओ जयजयकारा
आरक्षण की भैंस,चरेगी चर चर चारा
जल्दी  ही शौक़ीन  लगेंगे  शोर मचाने
अपनीअपनी फ़ौज,खुलेंगे घरघर थाने

सर्वाधिकार सुरक्षित©सुजीत शौक़ीन
تہانے کے سرکار ہیں ہونے تہے جو قید
دیمک پہر سے کہیت میں کیے گئے مُستیر
کیے گئے مُستید لگاو جی جیکارا
آرکشن کی بہینس چریگی چر چر چارا
جلری ہی شوقین لگینگے شور مچانے
اپنی اپنی فوج کہُلینگے گہر گہر تہانے
©سُجیت شوقین
(20/11/2015)
©कवि सुजीत शौक़ीन
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Saturday, November 14, 2015

बाल दिवस के मायने,उससे पूछें खास।
मांग रहा है भीख जो,बाल भवन के पास।।
(14/11/2015) ©सुजीत शौक़ीन
بال دوس کے ماینے اُس سے پُوچہیں کہاس
مانگ رہا ہے بہیکہ جو نال نہوب کے پاس
©سُجیت شوقین

Friday, November 6, 2015

लौ जी"वोट मशीन"में,हुआ फैसला बंद
देखा खूब बिहार का,जाति बद्ध हुडदंग
जाति बद्ध हुडदंग,चुनावी ता ता थैय्या
जनता सीधी गाय,ठगी जाएगी  गैय्या
कहता है शौक़ीन,छुरी चाकू की भौजी
विष जीते या जाम,मजा दोनों का लौ जी

(06/11/2015)
रचनाकार©कवि सुजीत शौक़ीन
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Tuesday, November 3, 2015

पुरुष स्त्री से वही चाहता है जो उसके पास है, जबकि औरत दुनिया की हर चीज पुरुष से चाहती है, उसके पास हो न हो।
         मतलब पुरुष परस्पर सम्बन्ध में ज्यादा  व्यवहारिक है,यानी संतोषी होता है।
         यार ये औरतें इतनी अस्त व्यस्त क्यों होती हैं, झगड़ा भी ठीक से नहीं करतीं, कारण कुछ होता है, जो पुरुष कभी समझ ही नहीं पाता, और लडाई किन्हीं अन्य कारणों से करतीं हैं।
       कई माननीय महिला मित्रों के 'स्त्री विमर्श' पढ़ने पडे आज, दिमाग की दही होने लगी तो सोचा, फेसबुक मित्रों के सामने रख देता हूँ इस दही को, वो मथेंगे तो शायद कुछ मक्खन निकल आए।

(03/11/2015) @सुजीत शौक़ीन
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Thursday, October 8, 2015

बुद्धू-बक्से पर चतुर,करते काँ काँ काँव
नाम लिखाकर रेस में,दौड़ रहे बिन पाँव
दौड़ रहे बिन पाँव,रबड़ की बॉल बने हैं
थूक  थूक कर  चाट रहे  वाचाल घने हैं
(08/10/2015)

रचनाकार©कवि सुजीत शौकीन
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ताना-बाना जात का,लगा धर्म का छोंक
मीठा  भारत का लहू,चूस  रहे हैं जोंक
चूस  रहे  हैं जोंक,लोक शाही ये कैसी
करते हैं खुदगर्ज, वतन की ऐसी-तैसी
कहता है शौक़ीन,राष्ट्र हित आगे लाना
करो सोच कर वोट,न देखो ताना-बाना

@सुजीत शौक़ीन (08/10/2015)

تانابانا جات کا لگا دہرم کا چہونک
میٹہا بہارت کا لہُو چُوس رہے ہیں جونک
چُوس رہے ہیں جونک لوک شاہی یے کیسی
کرتے ہیں خُدغرض وتن کی ایسی تیسی
کہتا ہے شوقین راصتر ہت آگے لانا
کرو سوچ کر وءٹ نہ دیکہو تانابانا

@سُجیت شوکین( 08/10/2015)
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Monday, September 21, 2015

आरक्षण की भागवत,कर डालो पड़ताल
तिकड़मबाजों ने किया,जातपात को ढ़ाल
जात पात  को  ढ़ाल,बनाते  भ्रष्टाचारी
भाग्य  देश  का चाट,रहे हैं "वोटाहारी"!
मुर्दों का ज्यूँ गिद्ध,किया करते हैं भक्षण
राष्ट्र वाद को मार,फला फूला आरक्षण
----------------------------------------------------
#नया ईजाद=वोटाहारी=वोट खानेवाला#
(21/09/2015)
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Thursday, September 3, 2015

गंगा जी के घाट पर,चढ़ा सियासी रंग
देखो हिन्दुस्तानियों,कव्वौं का सत्संग
कव्वौं का  सत्संग,चढ़े बगुले मंचों पर
बता रहे हैं केश,लगाकर विग गंजों पर
लेते क्यों  शौक़ीन,मगर मच्छों से पंगा
लिखो इश्किया छंद,नहाओ तुमभी गंगा

(03/09/2015)
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Wednesday, August 19, 2015

-----नागपंचमी विशेषांक-----
शंकर पूछे पार्वती कहाँ गए री नाग
मेरी भक्ति छोड़कर ध्याते किसको काग
ध्याते किसको काग वनासुर बाघ बघेरे
सारे दुष्ट विडाल कहाँ डाले हैं डेरे
लाद ट्रेन शौक़ीन गए सब दिल्ली भरभर
गौरा बोली नाथ सुनो रे भोले शंकर

(19/08/2015)
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Saturday, August 15, 2015

जिसने अबतक देश में,खाई काली क्रीम
जल्दी चिठ्ठा खोल दूँ,लगी हुई है टीम
लगी  हुई  है टीम,यहाँ  मैं  बोल रहा हूँ
संसद का हर मौन,यहाँ पर खोल रहा हूँ
अच्छे दिन शौक़ीन,लगेगें जल्दी दिखने
माँग रहा है वक्त,कही फिर मनकी जिसने

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Thursday, August 13, 2015

बादल बरसे झूमके झमझम मूसलधार
आलिंगन धरती करे मनकी बाँह पसार
मनकी बाँह पसार प्रीत दाता भी पाता
हर्षित  धरती मात संग हलधर हर्षाता
कहता है शौक़ीन  गगन में नाचे पागल
कितने दामन चूम रहा मनमौजी बादल

(13/08/2015)
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Sunday, July 19, 2015

मौसम महँगे का गया,अब सस्ते हैं आम
गिरते  गिरते  हो चुका  दस रुपैया दाम
दस  रुपैया दाम  अभी तो  और गिरेगा
कबतक लँगड़ा आम स्वर्ण के दाम बिकेगा
दिल्ली में शौक़ीन हुआ शोला भी शबनम
बदली हैं सरकार,बदल कब पाया मौसम

(19/07/2015)
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Wednesday, July 15, 2015

कलियुग में हर सास बहु रखती मनमें टीस
सास कहे बहु पाँव पड़ बहु कहे चढूँ शीश
बहु  कहे चढूँ शीश भिड़े आरी से आरी
घर  घर  में  भूचाल लड़े नारी  से  नारी

(15/07/2015)
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Saturday, June 27, 2015

लोकतंत्र की परिभाषा का,
        सुविधा से करते अनुवाद।
बो कर कांटे सींच रहे हैं,
       करने को बगिया बरबाद।।
कठमुल्ले सत्ता के दल्ले,
              बँटवारे की देते खाद।
ये ही आजादी है तो फिर,
         अपना भारत है आजाद।।
कुछ लोगों ने बाँध लिया है,
       राजसौख्य को अपने द्वार।
जनता हारी अब भारत की,
    बदल बदल अपनी सरकार।।
बस नेता आजाद हुए हैं,
           झूठे बाकी वाद विवाद।
भोली है भारत की जनता,
         फिरती है सर्पों को लाद।।

(28/06/2015)
(आल्हा छंद)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Friday, June 26, 2015

भीगे भीगे से मौसम में,ताप चढ़ा है दिल्ली में
थूक बिलोते हैं नेतागण,झाग बढ़ा है दिल्ली में

इक दूजे को नंगा करते,कौन मगर शर्मिंदा है
असमंजस है दर्शक अन्धे,या की दर्पण अंधा है
कुकुभ छंद
(26/06/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Thursday, June 25, 2015

आगे  निकले  चोरटे,  पीछे  छूटे  शाह
इक दूजे को साँग में, करते वा वा वाह
करते वा वा वाह,जिन्होंने ग़ज़ल सुधारी
ग़ज़ल पिलपिली यार,बताते बहुत करारी

(25/06/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Sunday, June 21, 2015

करते भाग गुणा घटा,पीछे छूटा योग
अपनें अपनें  ढ़ोंग में, जुटे हुए हैं लोग
जुटे  हुए हैँ लोग,चकाचक योगा होगी
दिल्ली में  है होड़,यहाँ  हैं  सारे जोगी
कहता है शौक़ीन,हकीकत ड़रते ड़रते
होता समतल पेट,अगर रोजाना करते

(21/06/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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करते भाग गुणा घटा,पीछे छूटा योग
विषय वासना भोगमें,जुते हुए हैं लोग
जुते हुए हैं लोग,बैल कोल्हू के बनकर
चरते जैसे ढ़ोर,जुगाली करते दिनभर
फैशन में शौक़ीन,क्रीम बस मुँह पर मलते
भीतर तन कंगाल,दिखावा बाहर करते

(21/06/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Friday, June 19, 2015

रमजान  सिखाता  है नेकी
रोजागर  सब्र  कमाता है

हक बाँट जरूरतमन्दों का
तब अपना हिस्सा खाता है

इफ्तार  कराता  जो बन्दा
खुद रोजागर  हो जाता है

हकदार वही है जन्नत का
जो शख्स अना रख पाता है

मत्त सवैया छंद(काव्यमित्र में प्रस्तुत)
(19/06/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Wednesday, June 17, 2015

वो कौन शिकारी है जिसने,घनघोर निशाना साधा है
हिरनी की आड़ निशाने पर,लेकिन जंगल का राजा है
क्या उसको इतना भान नहीं,राजा मजबूत खिलाड़ी है
वो  पल में  ताड़  गया होगा, परदे में  कौन अनाड़ी है
------------------------------------------------------
काव्यमित्र में प्रस्तुत एक सवैया
(17/06/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Saturday, June 13, 2015

कूड़ा कूड़ा हुई सियासत, अड़ बैठा झाड़ू वाला
राशन पानी ले दिल्ली पर,चढ़ बैठा झाड़ू वाला
या तो दे दो  ताकत सारी, वरना धरना  दे देंगे
लगता है धरने का नाटक,गढ़ बैठा झाड़ू वाला

(13/06/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Sunday, June 7, 2015

जनमन बंग्लादेश का,करता तुझे सलाम
बंग संग  है हिन्द के,सुन लें  देश  तमाम
सुन लें देश तमाम,कि भारत बोल रहा है
मिलकर बनें महान,कथन अनमोल कहा है
रंग सभी  शौक़ीन, अगर हो जाएँ रोशन
इन्द्रधनुष हो राष्ट्र,खिले भारत का जनमन
🌹🌹 🌻🌻
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Sunday, May 31, 2015

फूँक फूँक  कर ही यहाँ,बेटा धरना लात
बबलू ने  हामी भरी, यही  करूँगा तात
यही करूँगा तात मानकर सतकी सीड़ी
तबसे  धरता  पाँव फूँक कर पहले बीड़ी
धूँए  का  शौकीन जी रहा थूक थूक कर
सारा दिन सिगरेट पी रहा फूँक फूँक कर

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Monday, May 25, 2015

ताऊ बोल्या "सीरीज"-----------------
सौ दिन खागे आपिये ताऊ पीग्या साल
घर बाहर  दोनों जगह भैया ठालम ठाल
भैया ठालम  ठाल,बँधा ना गल मैं घण्टा
आच्छे  दिन हैं यार  नहीं है घर मैं टण्टा
के बोलै शौक़ीन देख ली सबकी खो खो
बिल्ली  सै  बीमार, लिये खा चूहे नौ सौ

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Wednesday, May 20, 2015

जैसे धरती गोल है चक्र समय का गोल
शब्द व्योम में घूमते सोच समझकर बोल
सोच समझकर बोल प्रकट जब होंगे आगे
बोल  बनेंगे  भूत   फिरोगे  भागे  भागे
कहता है   शौक़ीन  बड़े अच्छे हो वैसे
थोड़े  हो  नादान  मगर बच्चों के जैसे

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Saturday, May 16, 2015

बागड़ बिल्ले खोजते सीधी सादी कैट
पकड़ रहे हैं तितलियाँ बिछा बिछाकर नैट
बिछा बिछाकर नैट कई चंदू बुक सेलर
सिर्फ जनाना सूट सीलते हैं कुछ टेलर
सच्चाई शौक़ीन, बेचती घर घर पापड़
बेच रहे हैं झूठ  अदब से बिल्ले बागड़

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Sunday, May 3, 2015

इसमें सुविधा एक है,दुविधा मिलें हजार
शादी  करके  आदमी   हो जाता लाचार
हो  जाता  लाचार  दरोगा  बनती  बीबी
घोषित करती चोर खिलाकर अलपन लीबी
आग भला शौक़ीन हुई है किसके वश में
रोटी  मिलती  गर्म यही है सुविधा इसमें
(अलपन लीबी=टॉफी)
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Saturday, May 2, 2015

नटखट खटपट कर रहे चाचा खींचों कान
वरना  सत्यानाश   सब  कर  देंगे शैतान
कर  देंगे  शैतान  तुम्हारे  गुड़  का  गोबर
ढ़ीली  हुई  लगाम  सँभालो अपने जोकर
कहता है  शौक़ीन जरा सा  खाते चटपट
ज्यादा रहे बिखेर अनाड़ी वानर नटखट

(02/05/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
  रचनाकार  @   कवि सुजीत शौकीन
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Saturday, April 25, 2015

आज काँपे सभी रेत के वो थड़े,
बिल्डरों ने यहाँ जो किए हैं खड़े।

काठमांडू हिला साथ दिल्ली हिली,
हाँ हिले वो नहीं लोभ में जो पड़े।

घूसखोरी बनी पाँव की बेडियाँ,
कौन है जो यहाँ दोषियों से लड़े।

राम मेरे न भूकम्प लाना यहाँ,
लोग आकाश में ठाँव लेके चढ़े।

(25/04/2015)सवैया
काव्यमित्र में प्रस्तुत सर्वाधिकार सुरक्षित
  रचनाकार  @   कवि सुजीत शौकीन
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Thursday, April 16, 2015

घटते घटते हाथ के~~~ताव हुए हैं अल्प
जितने तिकड़मबाज हैं खोजें आज विकल्प
खोजें आज विकल्प चलाकर यादव मन्तर
जनता  दलदल मेल कहीं यादव योगेन्दर
 यादव  फिर तैयार  सियासत रटते रटते
जैसे  बढ़ता  दाद  अचानक  घटते  घटते

(16/04/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
  रचनाकार  @   कवि सुजीत शौकीन
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Tuesday, April 7, 2015

दुनिया जम्बू द्वीप का,कहती थी अभिमान
देखो अब  किस हाल में देता अपनी जान
देता अपनी जान ठगा जब खुद को पाता
लुटता यहाँ किसान बिचौला माल बनाता
मरता  है  शौक़ीन कहीं पर मरता बुधिया
मुठ्ठी भर अनुदान दिलासा देती दुनिया

(08/04/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Saturday, April 4, 2015

मनुष्य काम क्रोध लोभ मोह बंध काट दे
सुगन्ध बाँट विश्व के अपथ्य मार्ग पाट दे
समीर वृद्धि की बहे अबाध ठाटबाट दे
महाबली किसान को खुले हिये कपाट दे

(04/04/2015)     पंचचामर छंद
काव्यमित्र परिवार,सर्वाधिकार सुरक्षित
  रचनाकार @    कवि सुजीत शौकीन

Saturday, March 28, 2015

पत्थर तर जाए जिसे मिले राम का नाम
मानव साधन मात्र है करता धरता राम
करता धरता राम व्यर्थ मानव इतराता
माटी का तन श्वास थमे माटी बन जाता
होता है  शौकीन वही  जो  चाहे  ईश्वर
कहीं डूबती नाँव कहीं तर जाता पत्थर

(28/03/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
  रचनाकार @    कवि सुजीत शौकीन
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Thursday, March 26, 2015

बर्फ गिरी थी जब फसलों पर,ठाँव तुम्हारे ठण्डे थे
माँग रहे थे हक दिल्ली में, ताँव तुम्हारे ठण्डे थे
अन्नदाता का ध्यान नहीं है,सिडनी पर थी आँख गड़ी
जब कदमों से माँगी हरकत, पाँव तुम्हारे ठण्डे थे
(26/03/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Monday, March 23, 2015

वन्दन  हे  माँ  भारती  जन्मे  ऐसे पूत
फाँसी पर हँसकर चढ़े आजादी के दूत
आजादी के  दूत राष्ट्र  के  सच्चे नन्दन
गूंज उठा जय हिन्द नाद थर्राया लन्दन
तीन  तिलंगे  वीर  काटने  आए  बन्धन
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु शतशत वन्दन

(23/03/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Sunday, March 15, 2015

माखन मोहन मालती रोया राम गुलाम
सबनें  लूटे  हम  सदा  तू भी  लूटे राम
तू भी लूटे राम,फसल पर बर्फ गिराता
गोवर्धन को कृष्ण अभी क्यों नहीं उठाता
अनुशासन को तोड,चैत्र में लाया सावन
जब हम देंगे बर्फ,समझना तू भी माखन

(15/03/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Thursday, March 5, 2015

पिचकारी है प्रेम की, भरो खुशी का रंग।
होली का त्यौहार है, दिल में धरो उमंग।।

06/03/2015
@सुजीत शौकीन
होली की शुभकामनाएं---------------------
दिल्ली मेरठ  हाथरस  होली  का हुड़दंग
सुलफा गांजा सोमरस कहीं घोटकर भंग
कहीं  घोटकर भंग पियेंगे भर भर कुल्हड़
होली का त्यौहार कहें  या केवल  हुल्लड़
मूर्खों का  त्यौहार  करो मत बातें सिल्ली
खुशी  मनाओ  यार रहो मेरठ या दिल्ली

(05/03/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Wednesday, February 25, 2015

लोगो देखो फिर चढ़ा विक्रम पर बेताल
फिरफिर वैसा हाल है फिरफिर वही सवाल
फिर फिर वही सवाल देश से करते अन्ना
खेत बिके जो यार कहाँ फिर बोएँ गन्ना
कहता  है शौकीन   बैठ कर देखो पोगो
बोतल नई~ शराब पुरानी~देखो लोगो

(25/02/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Wednesday, February 18, 2015

चेले चार चिलम भरें,चेली चरण दबाय
नर नारी अर्पण करें,काली पीली आय
काली पीली आय,साध बन छोटामोटा
छोड़ नौकरी यार,बाँध ले लाल लँगोटा
बिन  माँगे  शौकीन, कहेंगे ले ले ले ले
हमारी भी सलाम, वोट जब माँगें चेले

(19/02/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Monday, February 16, 2015

बम बम का निनाद,शंखनाद  घंटनाद,
आरती में डम डम,डमरू के ताल की।

आदिऔअनादिनाथ,भूतनाथ भोलेनाथ,
अंग पे अनंग छवि,सजी है कमाल की।

योगी हठयोगी और,भोगियों वियोगियों की,
चहुँ दिश आ रही हैं,सज धज पालकी।

रुद्र माल गले डाले,नंग हैं अखाड़े वाले,
बोल रहे  जय जय, जय महाकाल की।

मनहरण
(17/02/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Sunday, February 15, 2015

कूटा काटा पाक को,कप करना क्या यार
हरा दिया नापाक अब,जीत मिले या हार
जीत  मिले या हार,उसी की लव लेड़ी थी
बदला लिया विराट,अनुष्का क्यूँ छेड़ी थी
भारत की  थी नार,फिल्म  में  चूमा चाटा
गुस्से में था यार, इसलिये कूटा काटा

(15/02/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Friday, February 13, 2015

आना कानी में हवा, बदल रही कुछ रंग
भँवरों का मन बाँवरा,शरद गरम के संग
शरद गरम के संग, करे इस माह सगाई
रजाई कुछ उदास, माँगने  लगी  विदाई
वैलंटाइन  मंत्र,  जपो मत   हिन्दुस्तानी
सवा सौ हैं करोड़, करो अब आनाकानी

(13/02/2015)
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Thursday, February 12, 2015

बम  पटाखे  फूल झड़ी,फूटे  नहीं अनार
कलपुर्जे जो चले नहीं,वापिस भेजो यार
वापिस भेजो यार कि घरकी दाल सही है
कुकड़ू कूँ आजाद करे क्या बात कही है
देखा है शौकीन शाजिया कृष्णा का दम
सबको था मालूम,बेवजह समझे थे बम

(12/02/2015) सर्वाधिकार सुरक्षित
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Wednesday, February 11, 2015

है जनता का फैसला,सहर्ष लो स्वीकार
बेतुकी  बकवाद कहीं,बढ़ा न  देवे रार
बढ़ा  न  देवे  रार, देखती  जनता भाई
थोड़ा धर लो धीर,चले  कब वाई फाई
व्यंग्य करे शौकीन, नहीं संता बंता का
तुरत फुरत अब धैर्य,टूटता है जनता का

(11/02/2015) सर्वाधिकार सुरक्षित
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Monday, February 9, 2015

किसी तरह  से आप ने,ली है बिल्ली मार
धरने जुमले छोड़ अब,काम करो सरकार
काम  करो सरकार, कि  वादे  नहीं चलेंगें
दिल  माँगे  अब  मोर,  इरादे  नहीं  चलेंगें
दिल्ली में शौकीन, बहकते नहीं  जिरह से
जुमलों से ये जीत,मिली है किसी तरह से

(10/02/2015) सर्वाधिकार सुरक्षित
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Thursday, February 5, 2015

फैल चुका है रायता,बहुत चुनावी गंद
अभी बारी  जनता की, भोंपू सारे बंद
भोंपू   सारे  बंद  हुए  हैं  सब संतों के
जनता करे इलाज वैद बन विषदंतों के
देख रहा शौकीन कौन किस और झुका है
कौन  करेगा साफ, रायता फैल चुका है

(05/02/15)  सर्वाधिकार सुरक्षित
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खेल चार दिन वाला,जीवन की रंगशाला,
धूप  कभी  छाँव  संग,  खेल  मेहमान ले।

रूह का  सफर  मानों,देह  इक  घर मानों,
चलती  का  नाम गाड़ी, रेल सम जान ले।

मानो मत इसे खेल, और नहीं कोई रेल,
अनंग से  आकार का,  मेल  पहचान ले।

दीप में  ईशान जले,तभी ये उजास रहे,
देह   दीप सम    रूह,तेल सम मान ले।

अनंग=निराकार
ईशान=ज्योति
------मनहरण घनाक्षरी---------
(05/02/15)   सर्वाधिकार सुरक्षित
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Tuesday, February 3, 2015

चल रहे हैं ट्वीट कहीं और कहीं पर ब्लोग
फुलटास पर हैं  नेता,ओवर हैं  अब स्लोग
ओवर हैं अब  स्लोग,हरेक बाल पर छक्के
वोटर  सिलि प्वाइंट खड़े  हैं  हक्के  बक्के
छंद   कहे   शौकीन,  अंधेरे   जल  रहे  हैं
दो  वाले  सब चार  पाँवों  पर  चल रहे हैं

(04/02/15)  सर्वाधिकार सुरक्षित
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बता दो आप कब कहाँ, हमनें मांगे मंच
कविता केवल शौक से,करते नहीं प्रपंच
करते   नहीं   प्रपंच,  सदा  अंधेरे   कूटे
नहीं  हवा  को  यार, बाँध  पाएँ  हैं खूँटे
मस्त बड़ा शौकीन,आँख से बंद हटा दो
जलना  है  बेकार, अंधेरों  को  बता  दो

(03/02/15)  सर्वाधिकार सुरक्षित
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Monday, February 2, 2015

झाड़ू कोई हाथ या,थाम खड़ा है फूल
हमको  लगते  एक से, सारे नामाक़ूल
सारे नामाकूल,बदलते इत उत पाला
देखी तवा परांत, वहीं पर ड़ेरा ड़ाला
खाने को हर बार, मिलें सत्ता के आडू
बेशक ही फिर यार,लगानी होवे झाड़ू

नामाक़ूल=नालायक
(19/01/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Sunday, February 1, 2015

जाम खुलेगा या रहे,मफलर या फिर क्रेन
दिल्ली  वाले  मथ रहे, दही  हुआ  है ब्रेन
दही हुआ है ब्रेन, मामला  फिफ्टी फिफ्टी
क्यों न सी  एम एक,रखे दूजे  को डिप्टी
सर्दी है  शौकीन  कहाँ अब  आम पकेगा
फास्ट ट्रैक पर क्रेन लगी है जाम खुलेगा

(01/02/2015) सर्वाधिकार सुरक्षित
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Friday, January 30, 2015

नंगा  उल्टा  टाँग दो और खिलाओ लीद
देखो विषधर बाप को,बतला रहा शहीद
बतला रहा शहीद,गया अब सिरसे पानी
हुर्रियत नाग नाथ, सभी हैं  पाकिस्तानी
कहता है शौकीन, करो अब पावन गंगा
चिमटे से  दो दाग, इन्हें कर करके नंगा

(30/01/15) सर्वाधिकार सुरक्षित
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Thursday, January 29, 2015

श्रीराम कभी तो यहाँ लड़लो एक चुनाव
पता तुम्हें भी चलेगा कुछ वोटों का भाव
कुछ  वोटों  का भाव भेद सारे  खोलेगा
यहाँ देख कर हाल इन्हीं जैसा  हो लेगा
कहता  है शौकीन  भूखे  हैं धन के सभी
सब का बेड़ा  पार  करेंगे  श्रीराम कभी

(29/01/15) सर्वाधिकार सुरक्षित
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Wednesday, January 28, 2015

कुण्डलिया छंद-घरवाली

घरवाली खुदकी लगे,है सर्व शक्तिमान
गलती एक  हुई सदा, भरते रहे लगान
भरते रहे लगान, पड़ी दो फसलें भारी
कोई तो श्रीमान, छुड़ाओ जान हमारी
शादी के शौकीन, शौक में बनते माली
बागों के सब फूल,तोड़ लेती घरवाली

(28/01/2015) सर्वाधिकार सुरक्षित
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कुण्डलिया छंद-अन्ना जी

अन्ना जी अब देखिये,दो चेलों की जंग
दो ही बस देखने को,बाकी सब हुड़दंग
बाकी  सब  हुड़दंग,  मचाते  देखे भाले
ईल्लू गिल्लू फोड़,रहे सब मुँह के छाले
मीठा ही शौकीन,मिले हमको गन्ना जी
चेले  ऐसे  और, यहाँ  भेजो  अन्ना जी

17/01/2015  सर्वाधिकार सुरक्षित
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Wednesday, January 21, 2015

कुण्डलिया छंद-गरीब आदमी पार्टी

गरीब आदमी  पार्टी, नई बनी  इक यार
अबतो हर मेंढ़की को,चढ़ने लगा बुखार
चढ़ने लगा बुखार, स्वाईन फ्लू के जैसा
गरीब खड़े कतार,  यहाँ  पैसा  ही पैसा
देता   है   शौकीन,  कांग्रेचुलेशन   हार्टी
बना  रहे  धनवान, गरीब  आदमी पार्टी

(21/01/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
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Monday, January 19, 2015

सांगोपांग सिंहावलोकन--मूषक लीला

डूबते जहाज में जी,जिसने भी छेद किये,
मौका पाके  वही  चूहे, देखे  गये  कूदते।

देखे गये कूदते वो, ड़ाल ड़ाल  पात पात,
जो भी मिले खाने से वो,कभी नहीं चूकते।

कभी नहीं चूकते वो,माल पुआ खोजने में,
ढूँढ  उसे   लेते सदा , सूंघते  वो  घूमते।

घूमते  हैं जिस घर, कर  देते  जर  जर,
जहाज भी चूहों ही के, छेदने  से डूबते।

19/01/2015(सांगोपांग सिंहावलोकन)
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रचनाकार @    कवि सुजीत शौकीन
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Thursday, January 15, 2015

कुण्डलिया छंद---किरण बेदी

भगवा पहने है किरण,क्या होगा अब यार
एक तो सर्दी उसपर , चलने  लगी  बयार
चलने  लगी  बयार,  गर्म  मफलर बौराये
दो  पाटन  के  बीच,  हाथ वाले  रिरियाये
आला पुलिस जनाब,जिसे कर लाये अगवा
अन्ना जी के स्कूल,पढ़ीं  अब पहने भगवा
16/01/2015
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Monday, January 12, 2015

कुण्डलिया छंद----समझ रहे हैं फिर गधे

समझ रहे हैं फिर गधे,हमको हरियल घास
शायद सावन आ रहा,सब अंधों को आस
सब  अंधों  को  आस,  कर  रहे  ढैचूँ ढैचूँ
काला  कंबल  ओढ़, माल  के  भारी खैचूँ
वोटों   के   शौकीन, वोट में  उलझ  रहे हैं
जनता को सब यार,गधा क्यों समझ रहे हैं
12/01/2015
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मुक्तक---सहस्र धाराओं से मिलकर

सहस्र धाराओं से मिलकर,बहते गंगा धारे हैं
टिमटिम करते जो तारे हैं,अंबर को सब प्यारे हैं
धर्म बताओ सत रंगों का,जाति सूर्य के घोड़ों की
उसनें किसमें भेद किया है,जिसमें टंगे सितारे हैं
12/01/2015
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Thursday, January 8, 2015

लंदन पेरिस हो रहा, सभी जगह आतंक--- कुण्डलिया छंद

लंदन पेरिस  हो रहा,सभी जगह आतंक
कौन विष मे बुझा हुआ,कौन मारता डंक
कौन  मारता  डंक,   कौन  सोचेगा  भाई
अगर न बोले आज, फिर मत देना दुहाई
कहता है  शौकीन,अभी भी करदो खंडन
देखो  तुमको  दोष, दे रहा  पेरिस  लंदन
08/01/2015
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अंगारियाँ उगल रहे---------कुण्डलिया छंद

अंगारियाँ उगल रहे,भाँति भाँति के लोग
इलाज  कोई भी नहीं, लगा देश को रोग
लगा   देश  को रोग, बढे  कुर्सी के रोगी
कमर रहे मटकाय, बिना दुम वाले डोगी
कहता है शौकीन, गधे लगाकर धारियाँ
खुदको कहें जिराफ,उगल रहे अंगारियाँ
08/01/2015
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