आंखें चार,जो हुई उनसे,हम चारों खाने चित हो गए।
पैमाने सब लगे झूमने,और मयखाने चित हो गए।
छोडो यार शराब को,करो सलाम,नशीले यार को,,
मुस्कुराने से जिसके,मयकश,दीवाने चित हो गए।
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुजीत शौकीन
मेरा पेज: https://www.facebook.com/pages/Kavi-Sujeet-Shokeen/253451778196049
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