जलवा क्या देखा,करार मांग बैठे,,
लिफ्ट मिलते ही,कार मांग बैठे।
ये क्या कर डाला,बिना हाल पूछे,,
तुम सीधे सीधे,क्यों प्यार मांग बैठे।
पहले की उनकी,ठीक बडाई होती,,
फिर धीरे धीरे,पींग बढाई होती।
मिलने जुलने का,दाव चलाते उनपे,,
फिर धीरे से अर्जी,सरकाई होती।
नाहक चप्पल की मार मांग बैठे,,
तुम सीधे सीधे,क्यों प्यार मांग बैठे।
18/06/2014
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुजीत शौकीन
फेसबुक: https://www.facebook.com/sujeet.shokeen
लिफ्ट मिलते ही,कार मांग बैठे।
ये क्या कर डाला,बिना हाल पूछे,,
तुम सीधे सीधे,क्यों प्यार मांग बैठे।
पहले की उनकी,ठीक बडाई होती,,
फिर धीरे धीरे,पींग बढाई होती।
मिलने जुलने का,दाव चलाते उनपे,,
फिर धीरे से अर्जी,सरकाई होती।
नाहक चप्पल की मार मांग बैठे,,
तुम सीधे सीधे,क्यों प्यार मांग बैठे।
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