Tuesday, June 17, 2014

छोटी बहर में एक नज्म
दोस्तों को नजर कर रहा हूँ।
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अनछुआ,अहसास ले लो।
धरती सारी,आकाश ले लो।

क्या करुंगा,मैं समंदर,,
मुझसे मेरी,प्यास ले लो।

शब्द शब्द,तेरे लिए है,,
विरह का,उपन्यास ले लो।

कंढी माला,छिनलो सब,,
वापस अब,सन्यास ले लो।

देखो भटके,कृष्ण तुम्हारा,,
राधा बनकर,रास ले लो।

तुम जीत ले लो,हार दे दो,,
लेकिन प्रेम,प्रवाह ले लो।

प्रदिप्त है पर,जल रहा है,,
'
शौकीन'का,संताप ले लो।

(17/06/2014)  09811783749
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुजीत शौकीन
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