दोस्तो दो लाईनों में पूरी बात,
कह पाया हूँ,तो दाद चाहूँगा।
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हैरत नहीं,जब नेताओं की बात पर,,
मजहबी भांजता(अलापता) है सुर।।
चिंता होती मगर,गधों के पांव बैठकर,,
जब कवि चाटता है खुर।।
20/06/2014
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुजीत शौकीन
फेसबुक: https://www.facebook.com/sujeet.shokeen
कह पाया हूँ,तो दाद चाहूँगा।
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हैरत नहीं,जब नेताओं की बात पर,,
मजहबी भांजता(अलापता) है सुर।।
चिंता होती मगर,गधों के पांव बैठकर,,
जब कवि चाटता है खुर।।
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