Sunday, June 15, 2014

पितृ दिवस पर आज अपनी एक पुरानी कविता की चन्द पंक्तियां याद आ रही हैं।-----------------------------------------
बरगद की छांव में,जब अकुलाते हैं,,
बाग फूलों का,तब अलग,खिलाया जाता है।
दिल रखवाले का,मगर तब रोता है,,
जब बरगद,गमलों में,सजाया जाता है।
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@सुजीत शौकीन
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