Thursday, June 12, 2014

गऊ माता

-----------गऊ माता------------
तुमपे ,गऊ माता,,किसीको भी,तरस नही आता।
क्यों रूठे हैं,पूत तेरे,,हमको माँ,समझ नहीं आता।
तुझको पूजा,रघुकुल ने,,
माता माना,गोकुल ने।
रघुकुल कीभी,रीत गई,,
भुला दिया माँ,गोकुल ने।
सो गए क्या,दानी दाता,,क्यूं बादल,बरस नही पाता।
क्यों रूठे हैं,पूत तेरे,,हमको माँ,समझ नहीं आता।
क्यूं सडकों पे,फिरती तू,,
कूड़ा कचरा,चरती तू।
ये क्यों दशा,हुई तेरी,,
बिन आई क्यूं,मरती तू।
कहाँ गए वो,कृष्ण सुदामा,,गोवर्धन क्यूं,दरक नहीं जाता।
क्यों रूठे हैं,पूत तेरे,,हमको माँ,समझ नहीं आता।
जननी माता,गऊ माता,,
परम पूनीत,धरती माता,,इनका वंदन,मोक्ष दिलाता।।।
कहाँ गए वो, ज्ञानी ज्ञाता,,
भारत माँ के,भाग्य विधाता,,जो कहते थे,गऊ है माता।।।
गोकशी जो,रोक ना पाता,,क्यूं तख्ता वो,पलट नहीं जाता।
क्यों रूठे हैं,पूत तेरे,,हमको माँ,समझ नहीं आता।
copyright@
सुजीत शौकीन।
https://www.facebook.com/sujeet.shokeen
फोन .:             09811783749

BLOG:       http://sujeetshokeen.blogspot.in/

No comments:

Post a Comment